यशोदा
एक सीधी-साधी महिला यशोदा अपनी परिस्थितियों की वजह से अपनी कोख किराए पर देने को तैयार हो जाती है। अचानक उसे समझ में आता है कि वह अनिश्चितताओं की दुनिया में कहीं उलझ गई है। हजारों नेताओं, डॉक्टरों और शक्तिशाली लोगों के बीच फंसी, आखिर वह कैसे उनके जाल से निकल पाती है?
